टनकपुर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के नेतृत्व में उत्तराखण्ड सरकार ने धार्मिक पर्यटन, सांस्कृतिक धरोहरों के संरक्षण एवं आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण को प्राथमिकता देते हुए जनपद चम्पावत के समग्र विकास हेतु दो महत्वपूर्ण परियोजनाओं को वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की है।उत्तराखण्ड निवेश एवं आधारभूत संरचना विकास बोर्ड (यूआईआईडीबी) के अंतर्गत प्रस्तावित शारदा घाट पुनर्विकास परियोजना को ₹107.35 करोड़ (रुपये एक सौ सात करोड़ पैंतीस लाख मात्र) की स्वीकृति दी गई है। परियोजना के प्रथम चरण में 40 प्रतिशत राशि ₹42.94 करोड़ की पहली किश्त शासन द्वारा जारी कर दी गई है। परियोजना का निर्माण कार्य पीआईयू, सिंचाई विभाग द्वारा किया जाएगा।
शारदा घाट पुनर्विकास परियोजना के अंतर्गत शारदा नदी के पावन तट को आधुनिक सुविधाओं से युक्त, सुरक्षित एवं सुव्यवस्थित धार्मिक-सांस्कृतिक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित किया जाएगा। परियोजना पूर्ण होने पर घाट क्षेत्र में सौंदर्याकरण, पैदल पथ, प्रकाश व्यवस्था, बैठने की सुविधा एवं स्वच्छता व्यवस्थाओं का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को बेहतर सुविधाएँ उपलब्ध होंगी।
इसी क्रम में शारदा रिवरफ्रंट परियोजना के अंतर्गत पूर्णागिरि मंदिर एवं पहुंच मार्ग पर वन सूचना केंद्र, सहायक सुविधाओं के विकास एवं भीड़ प्रबंधन कार्य हेतु ₹5.34 करोड़ (रुपये पाँच करोड़ चौंतीस लाख मात्र) की वित्तीय एवं प्रशासनिक स्वीकृति प्रदान की गई है। इस परियोजना के लिए प्रथम किश्त के रूप में 40 प्रतिशत राशि ₹2.136 करोड़ जारी की गई है। इस परियोजना के माध्यम से पूर्णागिरि मंदिर क्षेत्र में फॉरेस्ट इंफॉर्मेशन सेंटर की स्थापना, सहायक सुविधाओं का विकास, प्रभावी भीड़ प्रबंधन व्यवस्था तथा अप्रोच रोड का सुदृढ़ीकरण किया जाएगा। इससे लाखों श्रद्धालुओं को सुरक्षित, सुव्यवस्थित एवं सुगम यात्रा सुविधा मिलेगी।जिलाधिकारी मनीष कुमार ने कहा कि शारदा घाट पुनर्विकास एवं पूर्णागिरि मंदिर विकास परियोजनाएँ जनपद चम्पावत के लिए दूरगामी महत्व की हैं। इन योजनाओं से धार्मिक एवं सांस्कृतिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा,पर्यावरण संरक्षण को बल मिलेगा तथा तीर्थयात्रियों की यात्रा अधिक सुरक्षित और सहज होगी। साथ ही स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे और आर्थिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी।इन दोनों परियोजनाओं के पूर्ण होने से चम्पावत जनपद को धार्मिक, सांस्कृतिक, पर्यटन, आर्थिक एवं पर्यावरणीय दृष्टि से बहुआयामी लाभ प्राप्त होंगे तथा जनपद पर्यटन मानचित्र पर एक सशक्त पहचान स्थापित करेगा।
