लोहाघाट। कुमाऊँ में सर्वाधिक ओपीडी वाले लोहाघाट अस्पताल के लिए वह दिन अब दूर नहीं जब इसे औपचारिक रूप से राजकीय उप जिला चिकित्सालय का दर्जा मिल जाएगा। फिलहाल दीवारों पर बोर्ड बदल चुका है, पर सेवाएँ अभी भी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) की सीमाओं में ही सिमटी हैं। लेकिन दर्जा बढ़ते ही यहाँ स्वास्थ्य सुविधाओं की नई दुनिया खुलने जा रही है। यह अस्पताल न सिर्फ चंपावत जिले के तीन ब्लॉकों—लोहाघाट, पाटी और बाराकोट—बल्कि पिथौरागढ़, अल्मोड़ा और नैनीताल जिले की सीमा से लगे ग्रामीण क्षेत्रों का भी प्रमुख स्वास्थ्य केंद्र है। रोजाना भारी ओपीडी दबाव इसके महत्व को साबित करता है। राजकीय उच्च चिकित्सालय बनने के साथ ही लोहाघाट में चिकित्सा सुविधाओं का बड़ा विस्तार होगा। सीएचसी की तुलना में बजट ₹2 लाख से बढ़कर ₹30 लाख हो जाएगा। उच्च स्तरीय पैथोलॉजी सेवाएँ शुरू होंगी। इससे जिला अस्पताल में अब तक मौजूद मरीजों का भारी दबाव काफी हद तक कम होगा। सीएमओ डॉ. देवेश चौहान ने बताया कि लोहाघाट चिकित्सालय को सशक्त बनाना उनकी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल है। फिलहाल हड्डी रोग विशेषज्ञ की उपलब्धता के चलते जिला अस्पताल से सप्ताह में दो बार डॉ. धनंजय पाठक की सेवाएँ भी दी जा रही हैं, जिससे बड़ी संख्या में मरीजों को राहत मिली है।
चौहान ने बताया कि अस्पताल को उप जिला चिकित्सालय देने की प्रक्रिया पंजीकरण के कारण अटकी हुई थी, जिसे अब सीएमएस डॉ. विराज राठी द्वारा पूरा करा लिया गया है। निदेशालय से आवश्यक आदेश किसी भी समय जारी हो सकते हैं। सामाजिक कार्यकर्ता सचिन जोशी और नगरपालिका अध्यक्ष गोविंद वर्मा ने हाल ही में मुख्य सचिव आनंद वर्धन का स्वागत कर लोहाघाट अस्पताल की वास्तविक स्थिति और जनता की जरूरतों के बारे में विस्तार से अवगत कराया। मुख्य सचिव ने मामले पर गंभीरता से संज्ञान लेने का आश्वासन भी दिया।
